Dard Bhare Alfaaz

Dard Bhare Alfaaz

शायद अब कभी लौट ना पाऊं खुशियों के बाजार में,
गम ने ऊंची बोली लगाकर खरीद लिया है मुझे…

कुछ ना बचा मेरे इन दो खाली हाथों में,
एक हाथ से किस्मत रूठ गई,
तो दूसरे हाथ से मोहब्बत छूट गई।

जिंदगी जला दी हमने जैसी जलानी थी,
अब धुंऐ पर तमाशा कैसा और राख पर बहस कैसी!!

गम यह नही की वक्त ने साथ नही दिया,
गम यह है कि जिसको वक्त दिया उसने साथ नही दिया।

टूट कर चाहना और फिर टूट जाना,
बात छोटी है मगर जान निकल जाती है।

बाद तेरे जाने के मर गई ये देह
जो ज़िंदा बचा मेरी रूह में वो था
“तेरे होने का एहसास”

याद आते हैं तो फिर टूट के याद आते हैं
गुजरे हुए लम्हे, बिछड़े हुए लोग..!🖤

कर के बेचैन फिर मेरा हाल ना पूछा
उसने नजरें फेर लीं मैंने भी सवाल ना पूछा…

हर रिश्ते में बस यही गिला है,
हमें कोई हमसा नही मिला है।

अच्छी थी कहानी मगर अधूरी रह गई,
इतनी मोहब्बत के बाद भी दूरी रह गई….🥀