गुलज़ार साहब की जो दिल को छू लेंगी-Hindi Shayari

गुलज़ार साहब की जो दिल को छू लेंगी

 Me Tumse Ab Zagadta Bhi Nahi hu,

 Me Tumse Ab Zagadta Bhi Nahi hu(2)   

Tho Kya Ab Is Baat Par Zaghda Karoge.

में तुमसे अब झग़डा भी नहीं हु,

में तुमसे अब झग़डा भी नहीं हु,(२)

तो क्या अब इस बात पर झगड़ा करोगे !

Apna Kangan Samaj Rahi Ho Kya Mujko,

Apna Kangan Samaj Rahi Ho Kya Mujko(2)

 Aur Kitna Ghumaogi Mujko.

अपना कंगन समज रही हो क्या मुझको, 

अपना कंगन समज रही हो क्या मुझको,(२)

और कितना घुमाओगी मुझको!

Aina Kab Banaaogi Mujko,

Aina Kab Banaaogi Mujko, 

Mujse Kis Din Milaaogi Khudko .

आईना कब बनाओगी मुझको,

आईना कब बनाओगी मुझको,(२)

मुझसे किस दिन मिलाओगी खुदको !

Zara Nazdik Aakar Baith Jaao,

Zara Nazdik Aakar Baith Jaao,

Tumhare Sehar Me Sardi Bahut Hai.

ज़रा नज़दीक आकर बैठ जाओ,

ज़रा नज़दीक आकर बैठ जाओ,

तुम्हारे शेहर में सर्दी बहुत है!

 Me Uski Is Dua Se Dar Gaya Hu 

 Me Uski Is Dua Se Dar Gaya Hu 

 Ke Tumko Mujse Bhi Achhi Milegi.

में उसकी इस दुआ से डर गया हु  

में उसकी इस दुआ से डर गया हु  

के तुमको मुझसे भी अच्छी मिलेगी 

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